Hanuman Chalisa chanting tips हनुमान चालीसा पढ़ने के तरीके

Hanuman Chalisa chanting tips 


हनुमान चालीसा पढ़ने के तरीके 


II जय सियाराम II

जय बजरंग बलि !!

आप लोगो के साथ अपना एक नया अनुभव साझा  करने जा रहा हूँ  हनुमान चालीसा के सम्बन्ध में यह अनुभव है जैसा की आप सभी जानते हैं कि आम तौर पर हनुमान चालीसा एक ऐसा पाठ  है जो ज्यादातर सभी हिन्दू धर्म को मानने वाले  पढते या बोलते है यहाँ तक की बच्चों को भी यह पाठ  अच्छी तरह से बोलना आता है

इसके बारे में बहुत तरह की जानकारी ऑनलाइन मौजूद भी है इस पाठ के पढ़ने के तरीके को लेकर भी तरह-तरह की जानकारी ऑनलाइन मौजूद है आज आपके साथ जो जानकारी मै साझा करने जा रहा हूँ वो आप को अचरज या हैरत में डाल सकती है और यह भी हो सकता है की आप थोड़े से उलझन में भी पड़ जाएं. और यह भी मुझे उम्मीद है की शायद आप यह बात मानने या समझने के लिए थोड़ा समय भी लगा दे क्यूँकि यह जानकारी बहुत ही अलग है जो शायद कभी किसी ज्योतिषी या विद्वानों  के ध्यान में ना आ सकी या इसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया . इस अनुभव को जब मैंने खुद अपने ऊपर इस्तेमाल किया तो मुझे खुद भी एक अलग तरह की अनुभूति प्राप्त हुई और मुझे हनुमान पूजा का वास्तविक लाभ मिलना आरम्भ हो गया .

 जब मैंने इसके परिणाम देखे तो सोचा आप लोगो से भी क्यों ना इस अनुभव को साझा किया जाए. पर एक बात का ध्यान आपने यह रखना है की अगर आप को सही लगे तभी इस तरह से आप पाठ कीजियेगा अन्यथा आप जैसे करते है वैसे ही अपना पाठ करते रहीयेगा  . याद रखिये विश्वास है तो सब कुछ है अन्यथा कुछ नहीं है और आपको आपकी की गई पूजा के फल आपके अपने विश्वास के हिसाब से ही मिलते हैं 





जब आप हनुमान चालीसा पढ़ते  हैं तो क्या आप जानते है की किस जगह पर आपको अपना नाम भी लेना है ताकि की गई पूजा का पूरा फल आपको मिल सके. अगर नहीं तो आज आप को कुछ नया अनुभव होने वाला है 

जब आप हनुमान चालीसा पढते  है तो एक जगह पर आप को आ कर थोड़ा सा विराम देना है ताकि वहां अपना नाम लेने के साथ आप अपनी पूजा सम्पूर्ण कर सकें और वह जगह है आखिरी दोहे जहाँ पर आपको अपना नाम लेना है निम्नलिखित दोहा बोलते हुए आपको तुलसीदास जी की जगह अपना नाम लेना है वो इसलिए क्यूंकि इस  दोहे में तुलसीदास जी हनुमान जी से प्रार्थना करते हुए कह रहे हैं की :-

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। 

यानि की हिंदी में इसका अर्थ है की "तुलसीदास हनुमान जी के सदा से ही चेले हैं और कह रहे हैं की हे नाथ मेरे हृदय में आप अपना डेरा डाल  लो यानि दिल में बस जाओ",

अब चूँकि तुलसीदास जी अपने लिए यह लिख और पढ़ रहे है तो उन्होंने इसमें अपने लिए हनुमान जी से प्रार्थना की है पर जब आप इसे पढ़ रहे हैं तो आप को तुलसीदास जी की जगह पर अपना नाम लेना है ताकि आप यह कह सके की आप हनुमान जी के सदा से ही चेले है और हनुमान जी आपके मन में आ कर सदा के लिए बस जाए .

मुझे ऐसा करने से फायदा हुआ है और अगर आप इस बात से संतुष्ट हैं तो आप भी यह बात इस्तेमाल में ला सकते है ताकि आप की  पूजा का पूरा फल आप को मिल सके. कृपया करके आप जब पूरी तरह से निश्चिन्त हो तभी इस तरह से पूजा करें अन्यथा आप अपने तरीके पर ही कायम रहें . 

जय श्री राम!! 


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